फ्लैट 1301 – सकुरा हाई टॉवर की रहस्यमय कहानी | डरावनी कहानी

रात में ऊँची रेजिडेंशियल बिल्डिंग की छत पर खड़ी लड़की की परछाई, 42वीं मंज़िल 1:03 AM

फ्लैट 1301 – सकुरा हाई टॉवर की रूह कंपा देने वाली दास्तान।

​सपनों की ऊंची उड़ान और एक काली हकीकत

​शहर के सबसे पॉश इलाके में खड़ी 'सकुरा हाई रेसिडेंशियल टॉवर' किसी अजूबे से कम नहीं थी। 42 मंजिलों वाली यह कांच की इमारत दूर से ऐसी लगती थी मानो कोई विशाल हीरा जमीन से निकलकर बादलों को छूने की कोशिश कर रहा हो। शहर का हर अमीर इंसान यहाँ एक फ्लैट लेने का सपना देखता था। लेकिन इस चमक-धमक के पीछे एक ऐसा अंधेरा छिपा था जिसे बिल्डर्स ने करोड़ों रुपयों के नीचे दबा दिया था।

​आरव और सृष्टि, एक मिडिल क्लास कपल, जिन्होंने अपनी जिंदगी की पूरी जमापूँजी इस बिल्डिंग के फ्लैट नंबर 1301 को खरीदने में लगा दी थी। आरव एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर था और पिछले 8 सालों से एक छोटे से 1BHK के सीलन भरे कमरे में रहकर उसने यह मुकाम हासिल किया था। शिफ्टिंग वाले दिन जब वे अपनी बालकनी में खड़े थे, तो पूरा शहर उनके पैरों के नीचे था।

​आरव ने सृष्टि को गले लगाते हुए कहा, "सृष्टि, अब हमें ट्रैफिक का शोर नहीं, सिर्फ बादलों की सरसराहट सुनाई देगी। हम अब इस शहर के राजा-रानी हैं।" सृष्टि की आँखों में खुशी के आंसू थे, पर उसे क्या पता था कि जिस बुलंदी पर वो खड़ी है, वहां से गिरने का रास्ता बहुत छोटा है।

​पहली रात: 1:03 AM की वो खौफनाक जंजीरें

​शिफ्टिंग की थकान इतनी थी कि दोनों खाना खाकर तुरंत सो गए। रात का सन्नाटा गहरा था। सकुरा टॉवर की 42वीं मंजिल पर हवाएं इतनी तेज चलती थीं कि ऐसा लगता था मानो कोई खिड़कियों को खुरच रहा हो।

​ठीक रात के 1:03 बजे, आरव की आंख अचानक खुल गई। उसे महसूस हुआ कि कमरे का तापमान अचानक इतना गिर गया है कि उसकी रजाई भी उसे ठंड से नहीं बचा पा रही थी। तभी उसे ऊपर वाली मंजिल से एक आवाज सुनाई दी—

"घ्रर्र... घ्रर्र... घ्रर्र..."

​ऐसा लग रहा था जैसे कोई 50-60 किलो का पत्थर फर्श पर घसीट रहा हो। आरव को ताज्जुब हुआ क्योंकि 42वीं मंजिल आखिरी मंजिल थी, उसके ऊपर सिर्फ छत (Terrace) थी जो कि सालों से बंद पड़ी थी। उसने सोचा शायद कोई पानी की पाइपलाइन की आवाज होगी। लेकिन तभी एक और आवाज आई—"छन... छन...!"

​ये किसी जंजीर के टकराने की आवाज थी। आरव ने डरकर सृष्टि को जगाया। सृष्टि ने नींद में कहा, "आरव, ये नई बिल्डिंग है, शायद लिफ्ट के तारों की आवाज होगी, सो जाओ।" लेकिन आरव को नींद नहीं आई। वो पूरी रात जागता रहा, और वो आवाजें ठीक 2:00 बजे तक चलती रहीं।

​मैनेजर का डर और छिपा हुआ अतीत

​अगली सुबह आरव सीधा बिल्डिंग के मैनेजर, मिस्टर खन्ना के पास गया। खन्ना एक अधेड़ उम्र का आदमी था जो हमेशा डरा-डरा सा रहता था। जब आरव ने रात की आवाजों का जिक्र किया, तो खन्ना के हाथ से पेन नीचे गिर गया।

​खन्ना ने अपनी आवाज धीमी करते हुए कहा, "आरव जी, मैं आपसे झूठ नहीं बोलूंगा। जिस जमीन पर यह टॉवर खड़ा है, वहां सालों पहले एक नाचने वाली लड़की (डांसर) की कोठरी हुआ करती थी। बिल्डिंग बनते वक्त एक बड़े बिल्डर ने उस लड़की को इसी 1301 वाले हिस्से में कैद करके रखा था ताकि वो जमीन खाली न कर सके। वो उसे भारी लोहे की जंजीरों से बांधकर रखता था। एक रात उसने तंग आकर उन जंजीरों के साथ ही छत से छलांग लगा दी थी।"

​आरव का गला सूख गया। "लेकिन पुलिस ने कुछ नहीं किया?"

खन्ना ने सिर झुका लिया, "पैसा सब कुछ छुपा देता है साहब। लेकिन वो लड़की अपनी जंजीरें यहीं छोड़ गई।"

​तीसरी रात: मौत का आमंत्रण

​तीसरी रात आरव ने तय किया कि वो सच जानकर रहेगा। उसने अपने कमरे में एक स्पाई कैमरा लगाया और खुद हाथ में टॉर्च लेकर 1:00 बजे बाहर निकला। जैसे ही वो 1301 के दरवाजे से बाहर आया, उसे गलियारे में एक अजीब सी महक आई—सड़ते हुए चमेली के फूलों की महक।

​वो धीरे-धीरे सीढ़ियों से छत की तरफ बढ़ा। छत का लोहे का दरवाजा, जिसे मैनेजर ने 'सील' बताया था, वो आज चौड़ा खुला हुआ था। जैसे ही उसने छत पर कदम रखा, ठंडी हवा के एक झोंके ने उसका स्वागत किया। छत के बीचों-बीच एक साया खड़ा था।

​एक लड़की... जिसके बाल उसके घुटनों तक लंबे और गीले थे। उसके पैरों में वही भारी जंजीरें बंधी थीं जो फर्श पर रगड़ खाकर वो "घ्रर्र-घ्रर्र" वाली आवाज कर रही थीं। वो नाच रही थी। लेकिन उसका नाच ऐसा था जैसे कोई तड़प रहा हो। आरव की टॉर्च की रोशनी जब उस पर पड़ी, तो उसने अपनी गर्दन धीरे-धीरे पीछे की तरफ मोड़ी।

​उसका चेहरा नहीं था। वहां सिर्फ मांस के लोथड़े और गहरा काला गड्ढा था। वो आरव की तरफ बढ़ी और फुसफुसाते हुए बोली, "क्या तुम मेरा नाच पूरा करोगे?"

​खौफनाक अंत और सीसीटीवी का रहस्य

​अगली सुबह, सकुरा टॉवर के नीचे लोगों की भीड़ जमा थी। आरव की लाश सड़क पर क्षत-विक्षत पड़ी थी। पुलिस ने जब सीसीटीवी फुटेज चेक की, तो पुलिस वालों के भी हाथ कांपने लगे। फुटेज में दिख रहा था कि आरव छत पर अकेला खड़ा था। वो हवा में इस तरह हाथ-पैर मार रहा था जैसे कोई उसे जंजीरों से खींच रहा हो। फिर अचानक, वो खुद-ब-खुद हवा में उठा और उसे किसी ने मुंडेर से नीचे फेंक दिया।

​आज भी, फ्लैट 1301 में कोई नहीं रहता। लेकिन रात के 1:03 बजे, उस बिल्डिंग के नीचे से गुजरने वालों को आज भी जंजीरों के घसीटने की आवाज सुनाई देती है।

                            🔥 कहानी समाप्त

अगर ये कहानी पसंद आई तो इसे भी मिस मत करो: 



एक टिप्पणी भेजें

Previous Page📃 Next Page 📄